स्थाई बदलाव के लिए सीखने की रणनीति की भूमिका: भारत में मितानिन सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्तायों द्वारा सावर्जनिक उत्तरदायित्व को बढाने पर कार्य

दिनांक: दिसंबर 2018
लेखक: समीर गर्ग और शुचि पांडे

प्रकाशन का प्रकार: जवाबदेही नोट
द्वारा प्रकाशित: जवाबदेही अनुसंधान केंद्र

सारांश

क्या सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता सरकार के सार्वजनिक उत्तरदायित्व या जवाबदेही को बढाने में सक्षम हो सकते हैं जब कि वे स्वयं सरकार की फंडिंग पर निर्भर हों?

विश्व भर में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्तायों (सा.स्वा. कार्यकर्तायों) को सार्वजनिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में कार्य करने और उसमें सफलता हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. उनकी जवाबदेही ऊपर बैठे सरकारी अधिकारियों की ओर हो या उस जनता की ओर जो सरकारी स्वयों का उपयोग करती है? और क्या सा.स्वा. कार्यकर्ता सरकारी अधिकारियों को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने में योगदान दे सकते हैं? यह संघर्ष सा.स्वा. कार्यकर्तायों की सार्वजनिक जवाबदेही को बढाने सम्बंधित भूमिका पर केन्द्रित है (शाफ व् अन्य 2018).

इस लेख में मध्य भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में चल रहे मितानिन सा.स्वा. कार्यकर्ता कार्यक्रम के अनुभव का वर्णन और विश्लेषण किया गया है. यह बताता है कि किस प्रकार इस कार्यक्रम ने सीखने की एक रणनीति विकसित की जिससे मितानिन सा.स्वा. कार्यकर्ता लम्बे समय तक सार्वजनिक उत्तरदायित्व को बढाने हेतु काम कर पा रहे हैं, जबकि वे साथ साथ लोगों को स्वास्थ्य शिक्षा व् प्राथमिक इलाज देने और साश्कीय स्वास्थ्य सेवायों से जोड़ने की भूमिकाएं भी निभा रहे हैं.

इस लेख का मुख्य प्रस्ताव है कि सीखने की एक गतिशील रणनीति के कारण सरकारी व् गैर-सरकारी रणनीतिकार सार्वजनिक उत्तरदायित्व के लिए आवश्यक संस्थायों और प्रक्रियायों को विकसित कर पाए. हम समझना चाहते हैं कि कैसे सीखने की रणनीति इस कार्यक्रम को अपने बुनियादी विरोधाभासों को समझने और संभालने में सक्षम बनाती है, जिससे जवाबदेही पर इस कार्यक्रम द्वारा लगातार काम संभव हो पाता है.

इस लेख में सार्वजनिक उत्तरदायित्व पर मितानिन कार्यक्रम के विभिन्न प्रयासों के कई उदाहरणों पर चर्चा की गयी है. इन उदाहरणों को हम पांच प्रस्तावों के रूप में रखना चाहेंगे –

  1. सा.स्वा. कार्यकर्ता जनता को सेवाएं प्रदाय करने के साथ-साथ सार्वजनिक उत्तरदायित्व को बढाने में भूमिका निभा सकते हैं
  2. सा.स्वा. कार्यकर्ता सीखने और करने का साकारात्मक चक्र बना कर जवाबदेही की पैरवी के लिए एजेंडा निर्मित कर सकते हैं.
  3. सा.स्वा. कार्यकर्ता कई स्तरों पर प्रतिरोधात्मक ताकत निर्मित कर सकते हैं.
  4. सा.स्वा. कार्यकर्ता जनता के अधिकारों के साथ-साथ अपने लिए काम की बेहतर स्थितियों के लिए मांग रख सकते हैं.
  5. ‘एक्शन रणनीतिकार’ सा.स्वा. कार्यकर्तायों के कार्य को बढ़ावा देने हेतु आवश्यक सरकारी-गैरसरकारी संयुक्त संस्थायों का निर्माण कर सकते हैं.

उपरोक्त पांच प्रस्तावों के माध्यम से यह लेख दर्शाता है कि किस तरह यह कार्यक्रम एक तकनीकी हस्तक्षेप होने तक सीमित ना रह कर एक जन-आन्दोलन या मूवमेंट निर्माण के मार्ग पर चल सका.

समीर गर्ग

समीर गर्ग मितानिन कार्यक्रम के कार्यान्वयन में संलग्न प्रैक्टिशनर हैं. उच्चतम न्यायालय आयुक्तों के भोजन संबंधी अधिकारों के सलाहकार होने के साथ-साथ वह 22 वर्षों तक भारत में स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा के सार्वजनिक शासन का काम देखते रहे हैं. इस समय वे राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र में कार्यरत हैं और मुंबई स्थित टाटा समाज विज्ञान संस्थान में स्वास्थ्य प्रणाली प्रबंधन पर पीएचडी कर रहे हैं. उनकी रुचि के क्षेत्र हैं: सामुदायिक भागीदारी व स्वास्थ्य प्रबंधन और अन्य सार्वजनिक प्रणालियाँ.

शुचि पांडे

शुचि पांडे अमेरिकन विवि के स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल सर्विस में स्थित उत्तरदायित्व अनुसंधान केंद्र (ARC) में रेज़िडेंट स्कॉलर हैं. वह लोक सूचना अधिकार से संबंधित भारत के राष्ट्रीय अभियान और राजस्थान-आधारित सूचना व काम के अधिकार के अभियानों से संबद्ध हैं. शुचि के अनुसंधान-कार्य सामाजिक आंदोलनों, राज्य-सोसायटी संबंधों, सार्वजनिक उत्तरदायित्व और सामाजिक न्याय के अभियानों पर केंद्रित हैं.